Which Brick You Are Installing In Your Child’s Foundation?

Parenting

Parenting is a most powerful and deciding factor of your child’s character, mentality, behavior and actions towards the life, people, universe and circumstances. It is taking care of a child from his birth to maturity. It is a truth that parents can’t write their children future but they can set its foundation. You can easily develop a child at the place of modifying an adult. A child learns lots of new things such as fashion, games, knowledge from his school, friends, society and books. But his characteristic features like how to deal, act , behave, think, his morals, manners etc. are based on his parents, family background, and upbringing. Most of the cases parents are the mother & father, but in some cases it can be an elder sibling, a caretaker, or relative.

In all cases, being a parent is a very tough job, full of responsibility, care, awareness and sacrifices. For every child his parents are his ideal and the best persons of the world as he closely observe them and they are always right for him. He always try to be like them. So its your duty to maintain the discipline in your activities in front of your child, which has a direct effect on upbringing of your child. Every parent has the same goal ,” the best for their children”, but the way of treatment are different. Sometimes parents teaches the right lesson to their child but they select the wrong examples or wording. Such as all-time proving self parents wrong in front of their grandchildren like we awakes whole night in your sickness, your grand father even didn’t allow us to take proper rest. Some insults their wife and others like, Your mother has no sense of dressing. Mayank’ s father is selfish, he dose not love him.

At the place of degrading someone always show them the positive side of each and everyone’s situation. Tell them every parent provide the best facilities to his children according to their conditions and abilities. Teach them the equal importance of each family member Whether he is earning father or housewife mother, or the old grandparents. Teach them the importance of being self dependent for their regular activities. Don’t show the different behavior for girl and boy child. Remember, this is the actual platform where your boy is learning the value of a girl and respecting her and your girl is learning how much she can expect from a boy. Difference starts from the home.

Teach your children the value of hard work and education. Educate them for making responsible citizen at the place of money making machine. At the place of promoting them with your power and approach teach them to pass the exams with their hard work and knowledge. Don’t forget that you have such position due to your hard work. So don’t parallelize your child’s mental strength under the influence of your approach and power. Make them creative and productive.

Corruption also starts from the home. People used to take work from their children by paying some sweets and toys to them in return. “Give me one glass of water, I will give you a chocolate”. Don’t tell it to your father, I ‘ll buy a toy for you”. Sometime blackmails them,” If you will do this, I’ll complain your class teacher”, sometimes threaten them,” next time you will touch my laptop, I’will break your hands down”. In response, your child is habitual of such kind give and take. Now its his time and he will say first give me a bike, then I’ll do that particular thing. Don’t make your child a greedy, selfish, corrupt person. Don’t teach him the way of blackmailing and threatening you for his advantages.

Trust your child. Teach him the value of money and its saving. Give him some responsibilities according to his rising age. Appreciate his good works. Don’t insult him in front of others. Give him a little care and time. Nourish your child with morals not with luxury. Don’t predict negative future about him.” As I can see you will not serve us in our old age.” “You will become the slave of your wife”. Such wordings does not make a good impact on other person. Don’t spoil the relations with your tongue.

Don’t Force your thoughts and dreams on your child. Give the wings to his dreams and strength them by motivating him for achieving the goals. It is good to teach him your learnings but allow him to create his learnings with his own experiences. Try to maintain a good communicational relationship. Listen to him. Value his opinion. Respect his personal space. Be a friend to him and he will never hide anything from you. Give him the conclusion of his all confusions.

Sacrifice the habits you don’t want your child to adopt. Leave the habit of chewing tobacco , drinking alcohol, smoking etc. You can not stop your child of doing so, if you use to do the same things. Don’t use mobile and watch the television if you are not in favor of your child to do so.

Adopt a little change to deal with the modern generation. What you will give them today will get back to you tomorrow. Nothing will go with us at the end of life but make sure to left a wise and self dependent generation behind us. And our morals will always be there in the form of that implementing brick.

अपने मालिक स्वयं बनो

यदि  मैं तुम्हें  बता सकता कि तुम मुझे कितना शर्मिंदा महसूस कराते हो तो तुम कभी मेरी आंखों में देख नहीं पाते

सबसे अच्छी सीख, जो मुझे आज तक मिली  है वह यह है कि “ये तुम्हारी जिंदगी है, दूसरों के शब्दों में   मत  उलझो” l  हम में से अधिकांश दूसरों के शब्दों और व्यवहार से प्रभावित हो जाते हैं l   हम दूसरे लोगों के दृष्टिकोण और विचारों के अनुसार अपने  मूड को बदल लेते हैं l क्या अपने व्यवहार, मन की स्थिति, जीवन जीने का तरीका, सोचने की प्रक्रिया  एवं कार्य करने का तरीका सिर्फ इसलिए बदल लेना चाहिए, क्योंकि दूसरों को लगता है कि यह गलत है?  नहीं,  ऐसा करना उचित नहीं है l  हम अलग अलग व्यक्तित्व है l हमारे पास अपनी विभिन्न मन-स्थितियां,  सोच, मत, दृष्टिकोण, पसंद, नापसंद,  सपने, उद्देश्य,  विकल्प, महत्व, आदर्श और सिद्धांत है l

  कई बार  हमारे   करीबी लोग  हमारे प्रति आशा के विपरीत  व्यवहार व कार्य करते हैं l कभी कभी वह हमसे वह कार्य कराना चाहते हैं, जिसकी गवाही हमारी अंतरात्मा नहीं देती l  लेकिन फिर भी हम वह कार्य करते हैं क्योंकि हम सबको खुश रखना चाहते हैं l  हम नहीं चाहते कि किसी को बुरा लगे l हमें लगता है कि  यदि हम कार्य करने से इंकार कर देंगे तो यह हमारे अपनों  का अपमान होगा l

 वह कौन हैं : जिन्हें दूसरों के जीवन में हस्तक्षेप करने में मजा आता है l

 वह व्यक्ति जो स्वयं से संतुष्ट नहीं है, और अपनी तुलना दूसरों से करता है l वह व्यक्ति जो सोचता है, कि यदि उसके जीवन में कुछ अच्छा नहीं हो रहा है तो उसे दूसरों को परेशान करना चाहिए l जो दूसरों को तरक्की करते नहीं देख सकता l वह व्यक्ति जिसे अपनी काबिलियत और योग्यताओं पर भरोसा नहीं है और जिसके अंदर जीतने  का हौसला नहीं है l जो अपने समय, रिश्तों कार्यों और ज्ञान में तालमेल नहीं बैठा पाता तथा जिसे दिखावा पसंद है और जो बनावटी जिंदगी जीता है और  अस्थाई खुशियों की तलाश में रहता है l वह व्यक्ति जो हमेशा नकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है और  जो खुद से अनजान है l

खुद को जाने :  स्वयं पर स्वामित्व पाने का यह पहला कदम है l  खुद को पहचाने, अपने अंदर झांके, अपने  सकारात्मक पहलू को समझें l  एक  पैन और पेपर लेकर एक शांत स्थान पर बैठ जाएं और अपनी रुचियों, भयों, भटकावों और योग्यताओं को ज्ञात करने की कोशिश करें एवम जो भी विचार आपके मस्तिष्क में दौड़ रहे हैं, उन्हें पेपर पर लिखते रहें l उसके बाद उन्हें पढ़कर यह जानने की कोशिश करें कि किस प्रकार, आप अपनी कमजोरियों को हराकर अपनी योग्यता को निखार सकते हैं l अपनी वास्तविक ख़ुशी का ज्ञान सिर्फ और सिर्फ हमें ही होता है l

खुद को बदलने  के स्थान पर  खुद में सुधार लाने का प्रयत्न करें l  कोई भी स्थिति तुरंत नहीं बदली जा सकती दृष्टिगत बदलाव आने में थोड़ा समय लगता है l अगर हम किसी भी परिस्थिति को अचानक बदलने की कोशिश करें तो इसमें तो इसमें अधिक  प्रयास की आवश्यकता होगी, साथ ही शारीरिक तथा मानसिक  हानि भी होगी परन्तु यदि हम, स्वयं में सुधार लाने का प्रयास करें तो इसमें थोड़ा समय लगेगा किंतु हम स्वयं को अधिक योग्य बना सकेंगे l एक नियमित और निरंतर सुधार बहुत सारे लाभों के साथ हमारे अंदर एक बड़ा बदलाव ला सकता है l इसे एक बहुत ही साधारण से उदाहरण के द्वारा समझेंगे एक व्यक्ति है जो अपने मोटापे से परेशान है और  वह अपना वजन कम करना चाहता है जिससे कि वो स्वस्थ रह सके और आकर्षक व्यक्तित्व प्राप्त कर सके l  अब यदि वह अचानक से जिम जाना शुरू कर दे और डाइट चार्ट के अनुसार खाना शुरू कर दे, तो यह निश्चित है कि बहुत जल्दी वह अपने वजन कम करने के प्लान को त्याग देगा l कोई भी व्यक्ति जिसे रात को देर से सोने की आदत है, सुबह जल्दी नहीं उठ सकता l यदि नींद पूरी नहीं होगी, तो स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा l अचानक से  अपनी नियमित खुराक से कम कैलोरी लेना शुरू कर दे तो उसे कमजोरी और  आलस्य का सामना करना करना पड़ेगा, लेकिन यदि प्रत्येक सप्ताह आधे घंटे का छोटा सा बदलाव अपने  सोने के और जागने के  समय में करे , तो निश्चित ही वह कुछ महीनों में, सही समय पर सोना व जागना शुरू कर देगा l ठीक उसी प्रकार भोजन की मात्रा कम करने के स्थान पर भोजन के प्रकार में बदलाव करें l अर्थात् अधिक जंक फ़ूड के स्थान पर हरी सब्जियों का जूस , फलों का जूस और सलाद अपनी नियमित भोजन प्रणाली में शामिल करें l अकस्मात् कम की गई कैलोरी की मात्र आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव दाल सकती है किन्तु पौष्टिक भोजन आपको उचित पोषण प्रदान करता है l अधिक व्यायाम न करें बल्कि उसके स्थान पर अपने रोजमर्रा के कम अपने हाथों से करें और नजदीकी स्थानों पर छोटे मोटे कार्यों के लिए गाड़ी के स्थान पर पैदल जाना शुरू करें l इससे न सिर्फ आपका वजन कम होगा साथ ही आप अपनी नियमित दिनचर्या के कार्यों को भी अधिक कुशलता से संपन्न कर पाएंगे l

सबकी बात सुने, किन्तु व्यवहार अपने अनुसार करें  l एक अच्छा श्रोता होना बहुत अच्छी बात है, लेकिन दूसरों से एकदम प्रभावित न हो l सही और गलत के बीच भेद करने के लिए अपने मष्तिष्क के सभी भावों का प्रयोग करें l क्या हो रहा है और वास्तव में क्या होना चाहिए के मध्य के अंतर को समझें l प्रत्येक व्यक्ति के अपना जीवन जीने के कुछ उसूल व सिद्धांत होते हैं l ये उसूल और सिद्धांत ही उसके व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता को निर्धारित करते हैं l किसी भी दबाव, लालच एवम बहकावे में आकर अपने सिद्धांतों को छोड़ना नहीं चाहिए l

दूसरों को अपने जीवन में उनके शब्दों और विचारों के माध्यम से जहर मत घोलने दें l अपनी जीवन यात्रा की ख़ूबसूरती की सच्चाई के साथ मजबूती से खड़े रहें उन्हें किसी के वैध करार देने की आवश्यकता नहीं है  l

आत्मनिर्भर बनिए.. दूसरों पर आश्रित होने से आप उनकी इच्छानुसार  चलने के लिए बाध्य हो जाते हैं l अपने कार्यों को निर्धारित समय में स्वयं करने की कोशिश करें l दूसरों की बजाए स्वयं से उम्मीदें बढ़ाएं l यदि आप बिना अनुरोध के किसी की सहायता कर रहे हैं तो याद रखिये ये आपकी इच्छा है l इसके बदले में वह व्यक्ति भी आपके लिए पेबैक करने को मजबूर नहीं होगा l वह उसकी इच्छा पर निर्भर होगा. ठीक वैसे ही जैसे की आपके कार्यालय में आपके द्वारा निर्धारित समय से अधिक बिताया गया समय केवल तभी आपको ओवरटाइम का हकदार बनाएगा जब उसकी मांग कार्यालय के किसी  कार्य के संपादन के लिए हो और जिसके लिए आपके अधिकारी ने आदेश दिया हो, अन्यथा आप २४ घंटे वहाँ बैठे रहिये कोई मायने नहीं रखता l

दूसरों के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें. दूसरों पर शासन करने की कोशिश न करें l याद रखिये, आपके पास अधिकार जमाने के लिए आपका शरीर, शासन करने के लिए आपका मष्तिष्क , नियंत्रण करने के लिए आपकी जीभ एवं निर्धारण करने के लिए आपके कर्म हैं l

 “अपने व्यक्तित्व का सम्मान करें, और दूसरों के व्यक्तित्व का भी सम्मान करें , किसी के जीवन में हस्तक्षेप न करें और किसी को भी अपने जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमति न दें l केवल तभी आप एक दिन आध्यात्म को प्राप्त हो सकेंगे l ”                                                                       – ओशो

 अपनी वास्तविकता का त्याग किये बिना बदलावों को स्वीकार करें – नए प्रचलन को अवश्य अपनाये किन्तु अपना चलन बरकरार रखें. मैं तो यह कहूँगी की खुद ही प्रचलन बन जाएँ , जिसे लोग अपने चलन में लायें l दूसरों से अपने आचरण में केवल सकारात्मक विचारों को ग्रहण करें l

आशावादी बने l हमेशा सकारात्मक सोचें l उम्मीद रखें कि हमारा आने वाला कल आज से बेहतर होगा l अपने आस पास उन लोगों को रखे जिनकी उपस्थिति आपको साहसी और उत्साहित रहने की प्रेरणा देती है l जो आपके अच्छे कार्यों की सराहना करते हैं , और विपत्ति में साथ नहीं छोड़ते, वही आपके असल शुभ्चितक हैं l

किसी ने खूब कहा है कि, मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती यह थी कि मैंने लोगों को अपने जीवन में उनकी योग्यता से अधिक स्थान दिया l

अपनी हार स्वीकार करना सीखो l खुद का मालिक बनने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है l यह कठिन है किन्तु नामुमकिन नहीं l हमारी अनुमति के बिना हमे कोई हानि नहीं पहुंचा सकता l यदि हम अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीख लें तो आने वाले समय में , हमारे द्वारा गलतियाँ करने की सम्भावना कम हो जाएगी l

इस प्रकार हम अपने जीवन को कुछ गिनती के सालों के रूप में नहीं बल्कि एक खुशनुमा अनुभव के रूप में पायेंगे l

Is It Worth to Compare Yourself with Others?

Hello Everyone! Welcome Again to my blog post. Here I will talk about Comparison of yourself with others, either done by you or someone else. Its very interesting subject for me to discuses.

Now a days, stress is very common phenomenon which is unifying the whole world’s people together. Stress has no issues with Cast, Colors, Religion, Height, Poverty, Language, Country, State, Name, Fame etc…. It treats each and everyone equally. You believe or not, but it is a bitter truth, that persons are not much upset with own problems but more with others happiness. somewhere, the reason behind this desperation is Comparison. I will take simple example of a wife happily watching her social media updates and suddenly she started fighting with her husband by saying, look at Mrs. Sharma. she posted the pics of her Manali trip. See how much Mr. Sharma love his wife And you can’t even take us for a Dinner also. A woman , who was polite and calm got disturbed and furious within seconds.

While we starts comparing our self with others , an emotion of jealousy arises within us and we go through under desperation. The root Causes of jealousy is feeling of insecurity, fear of loosing, lake of self confidence and a poor self image. We think that others have better skills and qualities. We underestimates our abilities and without trying we find a conclusion that it is my destiny. Generally we think, everyone is better than us but we are only seeing the image one is portraying in front of us. We all are human beings and we have our own strengths and weaknesses. It is human nature to remember the impact of others on us.

Stop comparing yourself with others. Don’t bind yourself within limits. Be limitless to find out your strengths. Be yourself and keep around only those who accept you in the same way you are and don’t waste your time and energy to those who comparing you with others and wants you to loose your own identity. Always remember that, “No one can hurt you without your permission”.

Never complain your parents for what they couldn’t give you but always appreciate them because their love is selfless and they always do their best for you. Don’t blame others to your failure. Admit your mistakes and make sure to not repeat them again.

“We judge ourselves by our intentions. And others by their actions.”

There are two words Competition and Comparison. There is a very fine line between them. Competition can motivate us to improve ourselves and to learn from others that have skills and abilities that we don’t yet have. Or it can help those that have not yet acquired our level of skill. 

If we speak of comparing apples and oranges, it will be an unequal and unfair comparison; it is same as when we start comparing our homes, our parenting, our children, our ability to make balloon animals, or to do business. “Everyone is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid.” (Albert Einstein)

When we make unhealthy comparisons we do not see progress or strengths in ourselves and others because we are focused on what could be or should be. Someone may be better than us due to some God gifted talents, but hard work and Continuous practice can beat any talent.

So, Stop making comparisons of yours with others. Compete people for your betterment. Stay happy with whatever you have.

If you like it, hit the follow button to get more updates on my website. Give your reviews in comment box.  See you in my next blog…

Stay blessed!  Stay healthy!  Keep enjoying!

How to Overcome the Problem of Over Thinking

Hello Friends! I am back with my new topic………. hope you will enjoy the reading…

So, what Overthinking is? It is the process of converting your perceptions , regarding the same set of circumstances, from brighter to darker and sunny to stormy . Mostly Overthinking does negative impacts on our mind and health. It directs our behavior and actions in a wrong manner. Example : Here I will take a simple example of a student’s thought process before entering in the examination hall. Although he is well prepared for his exam but the masters sitting in his mind are announcing his future. The negative master is shouting hello! it is impossible of clearing the subject this year. I m telling which question you didn’t revised will surely come. You are a loser. You are good for nothing. everybody will laugh on you. How will you face your family and friends etc. Among these all there is a low voice of positive master who is encouraging him as , its OK , you will do it. But negativity is dominating the positivism and the result is souring throught, increasing heartbeat, sweating forehead and paralyzed power of thinking and understanding.

But we can handle this situation by giving more importance to the positive master and by thinking in a pleasant way. First we have to know about the reasons or the circumstances for which we starts negatively thinking. We should learn our behavior and attitude when we are in situation of over thinking. Do we get frustrated on our family and closed one’s in result of over thinking.
By knowing those reasons for which our mind goes negative and restless it becomes easy to handle the situation. We should note down those reasons and that behavior we do while we are depressed. Since we are human beings, we have the ability of thinking and understanding which differentiate us from other animals. We can’t stop our mind from thinking but we can change the direction of our thoughts by thinking about those things which make us happy and calm. We can prepare our brain to accept challenges by improving our self confidence. At the place of fear and depression we should face the problem. Without happening of an event we should not make our negative assumptions about its result. We should only make positive aspects regarding the situation. When the event will happen we will get the result.

There is another way which is very simple and interesting. We should develop our hobbies and maintain them regularly. Music is also a best medium to divert our mind and change its mood. We should do some creative things, Exercise and meditation. By doing these all we can inhance our concentration power.
By reducing the overthinking we can stay ourself away from many mental abnormalities such as tension, depression and uneasiness. We can improve our decision making power.
By following above simple steps we can overcome the problem of overthinking. In my further blogs I will go more deeply within the subject. Stay happy and healthy…. See u in my next blog….

Introduction

Hello Friends! This is my first blog. So here i am going to tell you about me and the content you will find in my upcoming blogs.

I am a writing lover person, I mean I love to write my thoughts and experiences in my diaries. We can learn a lot with our past experiences. By writing them we can maintain a healthy memory of our good and bad feelings, thoughts and experiences. Also we can remember those persons who comes in our life for a short period but gives the lesson for whole life.

When I want to show my emotions to someone and i feel hesitate to talk or don’t feel comfortable in making eye contact , I used to take the help of Paper, Pen or SMS . I think Words have magic. They can make you laugh, cry, angry…etc.

We all face many problems and different situations in our lives. At some instances we all have same stories, experiences, views and attitudes towards these ever changing situations. Here I decided to blog writing. By this we can relate our lives to each other and share our experiences. We can find solutions and some peace also. Its a way of connecting our minds and thoughts. We can explore our self more by Sharing our viewpoints. It will help us to improve our behavior in a tough situation also.

My blogs will be related with our daily life evens and with my thought process, how i feel and how i behave in different situations. Beside these you can also suggest me the topics and give me the ideas, so I can write on those also.

Hope you will enjoy the reading..

Stay Healthy, Stay Blessed!

See you soon in my next Blog with lots of interesting things……